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श्लोक 2.4.26  |
बालकेर सौन्दर्ये परीर हडल सन्तोष ।
ताहार मधुर - वाक्ये गेल भोक - शोष ॥26॥ |
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| अनुवाद |
| उस बालक की सुन्दरता देखकर माधवेन्द्र पुरी अत्यन्त संतुष्ट हो गये और उसके मधुर वचन सुनकर अपनी भूख-प्यास भूल गये। |
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| Madhavendra Puri was deeply gratified by the boy's beauty. Hearing his sweet words, he forgot all his hunger and thirst. |
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