श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.4.26 
बालकेर सौन्दर्ये परीर हडल सन्तोष ।
ताहार मधुर - वाक्ये गेल भोक - शोष ॥26॥
 
 
अनुवाद
उस बालक की सुन्दरता देखकर माधवेन्द्र पुरी अत्यन्त संतुष्ट हो गये और उसके मधुर वचन सुनकर अपनी भूख-प्यास भूल गये।
 
Madhavendra Puri was deeply gratified by the boy's beauty. Hearing his sweet words, he forgot all his hunger and thirst.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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