श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 190
 
 
श्लोक  2.4.190 
एइ भक्ति, भक्त - प्रिय - कृष्ण - व्यवहार ।
बुझितेओ आमा - सबार नाहि अधिकार ॥190॥
 
 
अनुवाद
"भक्त और भक्त के आराध्य श्रीकृष्ण के बीच प्रेमपूर्वक सेवा में प्रदर्शित ऐसा व्यवहार दिव्य है। इसे समझना सामान्य मनुष्य के लिए संभव नहीं है। सामान्य मनुष्यों में तो यह क्षमता भी नहीं होती।"
 
"Such a display of loving devotion between a devotee and his beloved Lord Krishna is divine. It is impossible for an ordinary person to understand it. Ordinary people simply do not have this capacity."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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