श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 187
 
 
श्लोक  2.4.187 
एइ तार गाढ़ प्रेमा लोके देखाइते ।
गोपाल ताँरे आज्ञा दिल चन्दन आनिते ॥187॥
 
 
अनुवाद
श्री गोपाल यह दर्शाना चाहते थे कि माधवेन्द्र पुरी कृष्ण से कितना प्रेम करते थे; इसलिए उन्होंने उन्हें चंदन और कपूर लाने के लिए नीलचल जाने को कहा।
 
“Sri Gopal did not want to show how deeply Madhavendra Puri loved Krishna; therefore he asked him to bring sandalwood and camphor from Nilachal.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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