श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 177
 
 
श्लोक  2.4.177 
महा - दया - मय प्रभु - भकत - वत्सल ।
चन्दन प रि’ भक्त - श्रम करिल सफल ॥177॥
 
 
अनुवाद
"भगवान बहुत दयालु हैं और अपने भक्तों के प्रति अनुरक्त हैं, इसलिए जब गोपीनाथ को चंदन के लेप से ढका गया, तो माधवेन्द्र पुरी का श्रम सफल हो गया।"
 
“The Lord is extremely merciful and is fond of His devotees; therefore, when Gopinath was anointed with sandalwood paste, Madhavendra Puri's efforts were fruitful.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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