श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 176
 
 
श्लोक  2.4.176 
म्लेच्छ - देशे कर्पूर - चन्दन आनिते जञ्जाल ।
पुरी दुःख पाबे इहा जानिया गोपाल ॥176॥
 
 
अनुवाद
"भारत के उन प्रांतों में जहाँ मुसलमान शासन करते थे, चंदन और कपूर लेकर यात्रा करना बहुत असुविधाजनक था। इस कारण माधवेंद्र पुरी को परेशानी हो सकती थी। यह बात गोपाल देवता को ज्ञात हो गई।"
 
"Traveling with sandalwood and camphor through Muslim-ruled Indian provinces was extremely inconvenient. This could cause trouble for Madhavendra Puri. Gopal-vigraha became aware of this."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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