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श्लोक 2.4.175  |
कर्पूर - चन्दन याँर अङ्गे चड़ाइल ।
आनन्दे पुरी - गोसाञि र प्रेम उथलिल ॥175॥ |
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| अनुवाद |
| “माधवेन्द्र पुरी ने गोपीनाथ के शरीर पर चंदन का लेप किया, और इस प्रकार वे भगवद् प्रेम से अभिभूत हो गये। |
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| “Madhavendra Puri applied sandalwood paste on the idol of Gopinath and thus he became overwhelmed with love for God.” |
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