vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति
»
श्लोक 174
श्लोक
2.4.174
याँर ला गि’ गोपीनाथ क्षीर कैल चुरि ।
अतएव नाम हैल ‘क्षीर - चोरा’ करि’ ॥174॥
अनुवाद
"माधवेंद्र पुरी के कारण भगवान गोपीनाथ ने मीठे चावल का बर्तन चुरा लिया। इस प्रकार वे क्षीर-कोरा [मीठे चावल चुराने वाला चोर] के नाम से प्रसिद्ध हुए।"
"It was because of Madhavendra Puri that Lord Gopinath stole the pudding pot. Thus he became known as 'Ksheer-Chora'."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×