श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.4.16 
प्रभुर प्रभाव देखि’ प्रेम - रूप - गुण ।
विस्मित हइला गोपीनाथेर दास - गण ॥16॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु के प्रगाढ़ प्रेम, उनके परम सौन्दर्य तथा उनके दिव्य गुणों को देखकर भगवान के सभी सेवक आश्चर्यचकित हो गए।
 
All the servants of the Deity were astonished to see the intense love of Sri Chaitanya Mahaprabhu, His exquisite beauty and His divine qualities.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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