श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 154
 
 
श्लोक  2.4.154 
चलिल माधव - पुरी चन्दन लञा ।
कत - दिने रेणाते उत्तरिल गिया ॥154॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार माधवेन्द्र पुरी चंदन का बोझ लेकर वृन्दावन के लिए चल पड़े और कुछ दिनों के बाद वे पुनः रेमुना गांव और वहां के गोपीनाथ मंदिर में पहुंचे।
 
In this way Madhavendra Puri set out for Vrindavan with sandalwood and after a few days he again reached Remuna village and the Gopinath temple there.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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