राज - पात्र - सने यार यार परिचय ।
तारे मा गि’ कर्पूर - चन्दन करिला सञ्चय ॥151॥
Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93
Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
अनुवाद
जो लोग सरकारी अधिकारियों से परिचित थे, वे उनसे मिलते और कपूर और चंदन मांगते, जिसे वे एकत्र कर लेते थे।
Those who were acquainted with the royal officials met them and collected camphor and sandalwood by begging for them.
तात्पर्य
ऐसा प्रतीत होता है कि जगन्नाथ देवता के लिए मलयज-चंदन (चंदन की लकड़ी) और कपूर का उपयोग किया जाता था। कपूर का उपयोग उनके आरती में किया जाता था और चंदन का उपयोग उनके शरीर को सूंघने के लिए किया जाता था। ये दोनों चीजें सरकारी नियंत्रण में थीं, इसलिए भक्तों को सरकारी अधिकारियों से मिलना पड़ता था। उन्हें सभी जानकारियों की सूचना देकर, उन्होंने जगन्नाथ पुरी के बाहर चंदन और कपूर ले जाने की अनुमति प्राप्त की।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥