श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 133
 
 
श्लोक  2.4.133 
क्षीर लह एइ, यार नाम ‘माधव - पुरी’ ।
तोमा ला गि’ गोपीनाथ क्षीर कैल चुरि ॥133॥
 
 
अनुवाद
मीठे चावल का बर्तन पकड़े हुए पुजारी ने पुकारा, "माधवेंद्र पुरी नाम के वह व्यक्ति कृपया आकर यह बर्तन ले जाएँ! गोपीनाथ ने आपके लिए मीठे चावल का यह बर्तन चुराया है!"
 
The priest picked up the pot of kheer and called out, "Whoever is named Madhavendra Puri, come and take this pot! Gopinath has stolen this pot of kheer for you!"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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