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श्लोक 2.4.130  |
स्वप्न देखि’ पूजारी उठि’ करिला विचार ।
स्नान क रि’ कपाट खुलि, मुक्त कैल द्वार ॥130॥ |
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| अनुवाद |
| सपने से जागकर पुजारी तुरंत बिस्तर से उठे और सोचा कि भगवान के कमरे में जाने से पहले स्नान कर लेना उचित होगा। फिर उन्होंने मंदिर का द्वार खोला। |
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| Upon realizing his dream, the priest immediately got up from his bed and decided to bathe before entering the Deity's chamber. He then opened the temple door. |
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