श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.4.13 
रेमुणाते गोपीनाथ परम - मोहन ।
भक्ति क रि’ कैल प्रभु ताँर दरशन ॥13॥
 
 
अनुवाद
रेमुना के मंदिर में गोपीनाथ का विग्रह अत्यंत आकर्षक था। भगवान चैतन्य ने मंदिर में दर्शन किए और बड़ी भक्ति से उन्हें प्रणाम किया।
 
The idol of Gopinath in the Remuna temple was very attractive. Chaitanya Mahaprabhu visited this temple and offered his obeisances with great devotion.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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