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श्लोक 2.4.114  |
सेवार सौष्ठव देखि’ आनन्दित मने ।
उत्तम भोग लागे - एथा बुझि अनुमाने ॥114॥ |
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| अनुवाद |
| व्यवस्था की उत्कृष्टता से माधवेन्द्र पुरी ने अनुमान लगाया कि केवल सर्वोत्तम भोजन ही परोसा गया था। |
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| From the excellence of the arrangements, Madhavendra Puri guessed that only the best food must be served there. |
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