श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  2.4.107 
मलयज आन, याञा नीलाचल हैते ।
अन्ये हैते नहे, तुमि चलह त्वरिते ॥107॥
 
 
अनुवाद
"जगन्नाथ पुरी से चंदन की लुगदी ले आओ। कृपया जल्दी जाओ। चूँकि कोई और यह काम नहीं कर सकता, इसलिए तुम्हें ही करना होगा।"
 
"Bring sandalwood from Jagannath Puri. Please go immediately. Since no one else can do this, you do it."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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