श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  2.4.106 
गोपाल कहे, पुरी आमार ताप नाहि याय ।
मलयज - चन्दन ले प’, तबे से जुड़ाय ॥106॥
 
 
अनुवाद
माधवेंद्र पुरी ने स्वप्न में गोपाल को देखा, जिन्होंने कहा, "मेरे शरीर का तापमान अभी भी कम नहीं हुआ है। कृपया मलय प्रदेश से चंदन लाएँ और उसका लेप मेरे शरीर पर लगाकर मुझे शीतल करें।"
 
In his dream, Madhavendra Puri saw Gopal saying, "My body temperature hasn't subsided yet. Bring sandalwood from the Malaya region and apply it to my body to cool me down."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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