श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  2.4.101 
एक महा - धनी क्षत्रिय कराइल मन्दिर ।
केह पाक - भाण्डार कैल, केह त’ प्राचीर ॥101॥
 
 
अनुवाद
शाही परिवार के एक बहुत धनी क्षत्रिय ने मंदिर बनवाया, किसी ने खाना पकाने के बर्तन बनवाए, तथा किसी ने चारदीवारी बनवाई।
 
A rich Kshatriya king built a temple, someone donated cooking utensils and someone built four walls.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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