श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 4: श्री माधवेन्द्र पुरी की भक्ति  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.4.10 
एइ - मत महाप्रभु चलिला नीलाचले ।
चारि भक्त सङ्गे कृष्ण - कीर्तन - कुतूहले ॥10॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु अपने चार भक्तों के साथ जगन्नाथ पुरी की ओर चल पड़े और उन्होंने बड़ी उत्सुकता के साथ भगवान के पवित्र नाम, हरे कृष्ण मंत्र का जाप किया।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu set out towards Jagannatha Puri with his four devotees, enthusiastically chanting the holy name of the Lord—the Hare Krishna mantra.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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