श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  2.3.93 
नित्यानन्द कहे - आमार पेट ना भरिल ।
लञा याह, तोर अन्न किछु ना खाइल ॥93॥
 
 
अनुवाद
नित्यानंद प्रभु ने फिर मज़ाक में कहा, "मेरा पेट अभी भरा नहीं है। कृपया अपना भोजन ले जाइए। मैंने तो अभी तक एक भी नहीं खाया है।"
 
Nityananda Prabhu again joked, "I'm still not full. Take your food away. I haven't eaten any of it."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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