श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  2.3.72 
भोजन करह, छाड़ वचन - चातुरी ।
प्रभु कहे - एत अन्न खाइते ना पारि ॥72॥
 
 
अनुवाद
अद्वैत आचार्य ने श्री चैतन्य महाप्रभु से प्रार्थना की कि वे भोजन करें और शब्दों का खेल छोड़ दें। भगवान ने उत्तर दिया, "मैं इतना भोजन नहीं खा सकता।"
 
Advaita Acharya requested Sri Chaitanya Mahaprabhu to give up his eloquence and eat. Mahaprabhu replied, “I really cannot eat so much food.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)