vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना
»
श्लोक 72
श्लोक
2.3.72
भोजन करह, छाड़ वचन - चातुरी ।
प्रभु कहे - एत अन्न खाइते ना पारि ॥72॥
अनुवाद
अद्वैत आचार्य ने श्री चैतन्य महाप्रभु से प्रार्थना की कि वे भोजन करें और शब्दों का खेल छोड़ दें। भगवान ने उत्तर दिया, "मैं इतना भोजन नहीं खा सकता।"
Advaita Acharya requested Sri Chaitanya Mahaprabhu to give up his eloquence and eat. Mahaprabhu replied, “I really cannot eat so much food.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×