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श्लोक 2.3.69  |
आचार्य कहे - वैस दोहे पिंड़िर उपरे ।
एत ब लि’ हाते ध रि’ वसाइल दुँहारे ॥69॥ |
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| अनुवाद |
| अद्वैत आचार्य ने कहा, "बस यहीं इन आसनों पर बैठ जाओ।" उनके हाथ पकड़कर उन्होंने दोनों को बैठा दिया। |
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| Advaita Acharya said, “Please sit on these seats.” He held their hands and made them sit. |
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