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अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना
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श्लोक 67
श्लोक
2.3.67
प्रभु बले - वैस तिने करिये भोजन ।
आचार्य कहे - आमि करिब परिवेशन ॥67॥
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "आओ हम इन तीन स्थानों पर बैठें और प्रसाद ग्रहण करें।" किन्तु अद्वैत आचार्य ने कहा, "मैं प्रसाद वितरित करूँगा।"
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, “Come, let us sit in these three places and take prasad.” But Advaita Acharya said, “I will distribute the prasad.”
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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