श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  2.3.60 
गृहेर भितरे प्रभु करुन गमन ।
दुइ भाइ आइला तबे करिते भोजन ॥60॥
 
 
अनुवाद
श्री अद्वैत प्रभु ने कहा, "मेरे प्रिय प्रभुओं, कृपया इस कक्ष में प्रवेश करें।" तब दोनों भाई, चैतन्य महाप्रभु और नित्यानंद प्रभु, प्रसाद ग्रहण करने के लिए आगे आए।
 
Sri Advaita Prabhu said, “O Lord, please come into this room.” Then both brothers Sri Chaitanya Mahaprabhu and Nityananda Prabhu came forward to accept the prasad.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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