श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.3.35 
आचार्य कहे, मिथ्या नहे श्रीपाद - वचन ।
यमुनाते स्नान तुमि करिला एखन ॥35॥
 
 
अनुवाद
जब श्री चैतन्य महाप्रभु ने नित्यानंद पर उन्हें धोखा देने का आरोप लगाया, तो श्रील अद्वैत आचार्य ने कहा, "नित्यानंद प्रभु ने जो कुछ भी आपसे कहा है, वह झूठ नहीं है। आपने अभी-अभी यमुना नदी में स्नान किया है।"
 
When Sri Chaitanya Mahaprabhu accused Nityananda of deception, Srila Advaita Acharya said, "What Nityananda Prabhu has told you is not a lie. You have indeed just bathed in the Yamuna River."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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