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श्री चैतन्य चरितामृत
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अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना
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श्लोक 27
श्लोक
2.3.27
अहो भाग्य, यमुनारे पाइलुँ दरशन ।
एत ब लि’ यमुनार करेन स्तवन ॥27॥
अनुवाद
भगवान बोले, "ओह, क्या सौभाग्य है! अब मैंने यमुना नदी देखी है।" इस प्रकार गंगा को यमुना नदी समझकर, चैतन्य महाप्रभु उसकी स्तुति करने लगे।
Mahaprabhu said, "Oh, what a blessing! Today I have seen the Yamuna River." Thus, recognizing the Ganges as the Yamuna River, he began to praise it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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