श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 200
 
 
श्लोक  2.3.200 
आनन्दित हैल आचार्य, शची, भक्त, सब ।
प्रति - दिन करे आचार्य महा - महोत्सव ॥200॥
 
 
अनुवाद
भगवान चैतन्य के इस निर्णय को अद्वैत आचार्य, माता शची और सभी भक्तों ने अत्यंत प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार किया। अद्वैत आचार्य ने प्रत्येक दिन एक महान उत्सव मनाया।
 
Mahaprabhu's decision pleased Advaita Acharya, Shachimata, and all the devotees. Advaita Acharya continued to organize grand celebrations every day.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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