vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना
»
श्लोक 196
श्लोक
2.3.196
प्रभु कहे, - कर तुमि दैन्य सम्वरण ।
तोमार दैन्येते मोर व्याकुल हय मन ॥196॥
अनुवाद
भगवान ने हरिदास ठाकुर को उत्तर दिया, "कृपया अपनी विनम्रता पर नियंत्रण रखें। आपकी विनम्रता देखकर ही मेरा मन बहुत व्याकुल हो जाता है।"
Mahaprabhu said to Haridasa Thakura, "Please control your poverty. Seeing your poverty, my mind is deeply troubled."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×