श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 189
 
 
श्लोक  2.3.189 
तुमि - सब लोक - मोर परम बान्धव ।
एइ भिक्षा मागों , - मोरे देह तुमि सब ॥189॥
 
 
अनुवाद
"मेरे प्यारे दोस्तों, आप सभी मेरे अभिन्न मित्र हैं। अब मैं आपसे एक अनुग्रह की याचना करता हूँ। कृपया इसे मुझे प्रदान करें।"
 
"My dear friends, you are all my close friends. Now I ask you all for a begging. Please give me this alms."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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