श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 188
 
 
श्लोक  2.3.188 
नवद्वीप - वासी आदि यत भक्त - गण ।
सबारे सम्मान करि बलिला वचन ॥188॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने नवद्वीप तथा अन्य नगरों से आये हुए सभी भक्तों को नमस्कार किया तथा उनसे इस प्रकार कहा।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu honored all the devotees who had come from Navadvipa and other cities and said to them as follows:
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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