श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 179
 
 
श्लोक  2.3.179 
शुनिया प्रभुर एइ मधुर वचन ।
शची - पाश आचार्यादि करिल गमन ॥179॥
 
 
अनुवाद
भगवान चैतन्य का कथन सुनकर अद्वैत आचार्य सहित सभी भक्त माता शची के पास पहुंचे।
 
Hearing the words of Mahaprabhu, all the devotees including Advaita Acharya went to Shachimata.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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