श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 172
 
 
श्लोक  2.3.172 
शुनि’ भक्तगण कहे क रि’ नमस्कार ।
मातार ये इच्छा सेइ सम्मत सबार ॥172॥
 
 
अनुवाद
माता शची की यह प्रार्थना सुनकर सभी भक्तों ने प्रणाम किया और कहा, "माता शची जो भी चाहती हैं, हम सभी उससे सहमत हैं।"
 
Hearing this request of Shachimata, all the devotees greeted her and said, “We all agree with the wish of Shachimata.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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