श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 169
 
 
श्लोक  2.3.169 
शुनि’ शची सबाकारे करिल मिनति ।
निमाञि र दरशन आर मुञि पाब कति ॥169॥
 
 
अनुवाद
भगवान के अन्य भक्तों के इन प्रस्तावों को सुनकर माता शची ने भक्तों से कहा, "मुझे निमाई के दर्शन का अवसर कितनी बार मिलेगा?"
 
Hearing such proposals from other devotees of Mahaprabhu, Shachimata said to the devotees, “Now when will I get the opportunity to have the darshan of Nimai?”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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