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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 2: मध्य लीला
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अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना
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श्लोक 157
श्लोक
2.3.157
यत लोक आइल महाप्रभुके देखिते ।
नाना - ग्राम हैते, आर नवद्वीप हैते ॥157॥
अनुवाद
लोग श्री चैतन्य महाप्रभु के दर्शन के लिए आस-पास के विभिन्न गांवों के साथ-साथ नवद्वीप से भी आते थे।
Apart from Navadwip, people from various other nearby villages also came to have darshan of Sri Chaitanya Mahaprabhu.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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