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श्लोक 2.3.156  |
आनन्दे नाचये सबे ब लि’ ‘हरि’ ‘हरि’ ।
आचार्य - मन्दिर हैल श्री - वैकुण्ठ - पुरी ॥156॥ |
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| अनुवाद |
| सभी लोग हरि के पवित्र नामों का जप कर रहे थे और नृत्य कर रहे थे। इस प्रकार अद्वैत आचार्य का निवास श्री वैकुंठ पुरी में परिवर्तित हो गया। |
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| Everyone was dancing and chanting the holy name Harinam. Thus, Advaita Acharya's residence was transformed into Sri Vaikunthapuri. |
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