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श्लोक 2.3.146  |
तोमार पालित देह, जन्म तोमा हैते ।
कोटि जन्मे तोमार ऋण ना पारि शोधिते ॥146॥ |
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| अनुवाद |
| "यह शरीर आपसे ही उत्पन्न हुआ है, और आपसे ही प्राप्त हुआ है। मैं करोड़ों जन्मों में भी इस ऋण से उऋण नहीं हो सकता।" |
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| This body has been nurtured by you and is born of you. I cannot repay this debt even in millions of lifetimes. |
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