श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 136
 
 
श्लोक  2.3.136 
एइ - मत दश - दिन भोजन - कीर्तन ।
एक - रूपे क रि’ करे प्रभुर सेवन ॥136॥
 
 
अनुवाद
अद्वैत आचार्य ने लगातार दस दिनों तक संध्या भोज और कीर्तन का आयोजन किया। उन्होंने बिना किसी परिवर्तन के इसी प्रकार भगवान की सेवा की।
 
Advaita Acharya thus organized evening feasts and kirtans for ten consecutive days. He continued serving Mahaprabhu in this manner without any change.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)