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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 2: मध्य लीला
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अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना
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श्लोक 129
श्लोक
2.3.129
देखिया चिन्तित हैला यत भक्त - गण ।
आचम्बिते उठे प्रभु करिया गर्जन ॥129॥
अनुवाद
भगवान की यह दशा देखकर सभी भक्तगण बहुत चिंतित हो गए। तभी अचानक भगवान उठ खड़े हुए और गर्जना करने लगे।
Seeing Mahaprabhu's condition, all his devotees became extremely worried. Then suddenly Mahaprabhu stood up and roared.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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