श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 123
 
 
श्लोक  2.3.123 
अश्रु, कम्प, पुलक, स्वेद, गद्गद वचन ।
क्षणे उठे, क्षणे पड़े, क्षणेक रोदन ॥123॥
 
 
अनुवाद
उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे, उसका पूरा शरीर काँप रहा था। उसके रोंगटे खड़े हो गए थे, उसे बहुत पसीना आ रहा था, और उसके शब्द लड़खड़ा रहे थे। कभी वह खड़ा होता, कभी गिर जाता। और कभी रोता।
 
Tears welled up in his eyes, and his entire body trembled. He felt goosebumps, his body sweated, and his speech became slurred. He would sometimes stand up, sometimes fall down, and sometimes break down in tears.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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