श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  2.3.106 
बहुत नाचाइले तुमि, छाड़ नाचान ।
मुकुन्द - हरिदास लइया करह भोजन ॥106॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "अद्वैत आचार्य, आपने मुझे अनेक प्रकार से नचाया है। अब यह अभ्यास छोड़ दीजिए। मुकुंद और हरिदास के साथ जाकर भोजन ग्रहण कीजिए।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, "Advaita Acharya, you have made me dance a lot. Now stop doing that. Go and have dinner with Mukunda and Haridasa."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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