श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु का अद्वैत आचार्य के घर रुकना  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  2.3.102 
एत ब लि’ दुइ जने कराइल आचमन ।
उत्तम शय्याते लइया कराइल शयन ॥102॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद, अद्वैत आचार्य ने भगवान् के हाथ-मुँह धुलवाए और उन्हें एक सुंदर शय्या पर लिटाकर विश्राम कराया।
 
Advaita Acharya then had the two lords wash their hands and faces. He then led them to a beautiful bed and laid them down to rest.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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