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श्लोक 2.25.65  |
चौदिकेते लक्ष लोक बले ‘हरि’ ‘हरि’ ।
उठिल मङ्गल - ध्वनि स्वर्ग - मर्त्य भ रि’ ॥65॥ |
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| अनुवाद |
| सभी दिशाओं में लाखों लोग “हरि! हरि!” का जाप करने लगे। इस प्रकार समस्त ब्रह्माण्ड में एक कोलाहलपूर्ण और मंगलमय ध्वनि उत्पन्न हो गई। |
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| Millions of people in all directions shouted, "Hari! Hari!" This tumultuous and auspicious sound filled the entire universe. |
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