श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  2.25.65 
चौदिकेते लक्ष लोक बले ‘हरि’ ‘हरि’ ।
उठिल मङ्गल - ध्वनि स्वर्ग - मर्त्य भ रि’ ॥65॥
 
 
अनुवाद
सभी दिशाओं में लाखों लोग “हरि! हरि!” का जाप करने लगे। इस प्रकार समस्त ब्रह्माण्ड में एक कोलाहलपूर्ण और मंगलमय ध्वनि उत्पन्न हो गई।
 
Millions of people in all directions shouted, "Hari! Hari!" This tumultuous and auspicious sound filled the entire universe.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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