श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.25.6 
सन्यासीरे कृपा पूर्वे लिखियाछों विस्तारिया ।
उद्देशे कहिये इहाँ सङ्क्षेप करिया ॥6॥
 
 
अनुवाद
आदि-लीला के सातवें अध्याय में मैंने पहले ही श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा वाराणसी में संन्यासियों के उद्धार का विस्तृत वर्णन किया है, लेकिन मैं इस अध्याय में इसे संक्षेप में दोहराऊंगा।
 
I have already described in detail the salvation of the sannyasis by Sri Chaitanya Mahaprabhu in Varanasi in the seventh chapter of Adilila, but in this chapter I will repeat it briefly.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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