श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 263
 
 
श्लोक  2.25.263 
सङ्क्षेपे कहिलुँ एइ मध्य - लीलार सार ।
कोटि - ग्रन्थे वर्णन ना याय इहार विस्तार ॥263॥
 
 
अनुवाद
मैंने अब मध्यलीला का सम्पूर्ण विषय संक्षेप में प्रस्तुत कर दिया है। इन लीलाओं का वर्णन लाखों ग्रंथों में भी विस्तृत रूप से नहीं किया जा सकता।
 
I have now summarized the entire subject of the Madhyam Leela. These pastimes cannot be described in detail even in millions of books.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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