श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 250
 
 
श्लोक  2.25.250 
नवमे - कहिलुँ दक्षिण - तीर्थ - भ्रमण ।
दशमे - कहिलुँ सर्व - वैष्णव - मिलन ॥250॥
 
 
अनुवाद
नवें अध्याय में मैंने भगवान की दक्षिण भारत यात्रा तथा विभिन्न तीर्थस्थानों का वर्णन किया है। दसवें अध्याय में मैंने उनके भक्तों से भेंट का वर्णन किया है।
 
In Chapter Nine, I describe Mahaprabhu's journey to South India and various pilgrimage sites. In Chapter Ten, I describe Mahaprabhu's meetings with all his devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)