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श्लोक 2.25.246  |
चतुर्थे - माधव पुरीर चरित्र - आस्वादन ।
गोपाल स्थापन, क्षीर - चुरिर वर्णन ॥246॥ |
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| अनुवाद |
| चौथे अध्याय में मैंने माधवेन्द्र पुरी द्वारा गोपाल विग्रह की स्थापना तथा गोपीनाथ द्वारा रेमुणा में गाढ़े दूध का बर्तन चुराने का वर्णन किया है। |
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| In the fourth chapter I have described the installation of Gopala Archavigraha by Madhavendra Puri and the theft of the Kheerpatra by Gopinatha in Remuna. |
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