श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 244
 
 
श्लोक  2.25.244 
द्वितीय परिच्छेदे - प्रभुर प्रलाप - वर्णन ।
तथि - मध्ये नाना - भावेर दिग्दरशन ॥244॥
 
 
अनुवाद
दूसरे अध्याय में मैंने श्री चैतन्य महाप्रभु के पागलों की तरह बोलने का वर्णन किया है। इस अध्याय में बताया गया है कि श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपनी विभिन्न भाव-भंगिमाओं को किस प्रकार प्रकट किया।
 
In Chapter 2, I described Sri Chaitanya Mahaprabhu's madness. This chapter also pointed out how Sri Chaitanya Mahaprabhu displayed various expressions.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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