श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 228
 
 
श्लोक  2.25.228 
दामोदर - स्वरूप, पण्डित - गदाधर ।
जगदानन्द, काशीश्वर, गोविन्द, वक्रेश्वर ॥228॥
 
 
अनुवाद
स्वरूप दामोदर, गदाधर पंडित, जगदानंद, काशीश्वर, गोविंदा और वक्रेश्वर जैसे भक्त भगवान से मिलने आए।
 
Swaroop Damodar, Gadadhar Pandit, Jagadananda, Kashishwar, Govind and Vakreshwar - all these devotees came to meet Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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