श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 220
 
 
श्लोक  2.25.220 
महाप्रभुर उपर लोकेर प्रणति देखिया ।
सुखी हैला लोक - मुखे कीर्तन शुनिया ॥220॥
 
 
अनुवाद
जब रूप गोस्वामी ने देखा कि वाराणसी के सभी लोग श्री चैतन्य महाप्रभु का आदर करते हैं, तो वे बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने आम जनता से कहानियाँ भी सुनीं।
 
When Rupa Goswami saw that all the people of Varanasi respected Sri Chaitanya Mahaprabhu, he was very happy. He even heard stories from ordinary people.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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