श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 181
 
 
श्लोक  2.25.181 
याँर इच्छा, पाछे आइस आमारे देखिते ।
एबे आमि एका यामु झारिखण्ड - पथे ॥181॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "यदि आप मुझे देखना चाहते हैं, तो आप बाद में आ सकते हैं, लेकिन फिलहाल मैं झारिखंड वन से अकेले ही जाऊंगा।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, “If you want to meet me, you can come later, but right now I will go alone through the Jharkhand forest.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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