श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 165
 
 
श्लोक  2.25.165 
सब काशी - वासी करे नाम - सङ्कीर्तन ।
प्रेमे हासे, काँदे, गाय, करये नर्तन ॥165॥
 
 
अनुवाद
काशी [वाराणसी] के सभी निवासी प्रेमोन्मत्त होकर हरे कृष्ण महामंत्र का जप करने लगे। कभी वे हँसते, कभी रोते, कभी कीर्तन करते, तो कभी नाचते।
 
All the residents of Kashi (Varanasi) became overwhelmed with love and began chanting the Hare Krishna mantra. Sometimes they laughed, sometimes they cried, sometimes they chanted, and sometimes they danced.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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